मुंबई (दानिश खान )अभिनेत्री शिवांगी वर्मा, जो छोटी सरदारनी, तेरा इश्क़ मेरा फ़ितूर जैसे सीरियल और हाल ही में बैडास रवि कुमार में नजर आईं, मानती हैं कि मुंबई सचमुच सपनों का शहर है, लेकिन साथ ही यह हर इंसान की परीक्षा भी लेता है।
अपनी ज़िंदगी और आम मुंबईकर की ज़िंदगी की तुलना करते हुए वह कहती हैं, “मेरे लिए मुंबई प्रेरणा भी है और चुनौती भी। मैं हर दिन अपने सपनों के पीछे भागती हूं, लेकिन मुझे पता है कि यहां हर इंसान किसी न किसी तरह अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रहा है। फर्क सिर्फ रास्तों का है, संघर्ष सबके लिए है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी उन्हें लगता है कि वे आम लोगों की मुश्किलों से कटी हुई हैं, तो शिवांगी ने साफ़ कहा, “नहीं, बिलकुल नहीं। मैं भी ट्रैवल करती हूं, ट्रैफिक झेलती हूं और जानती हूं कि महंगाई लोगों की ज़िंदगी को कैसे प्रभावित करती है। ये सब मेरी ज़िंदगी का हिस्सा भी हैं। एक्टर होने का मतलब ये नहीं कि मैं असलियत से दूर हूं।”
वह आगे कहती हैं कि उन्हें शहर के लोगों की मेहनत और जज़्बे से गहरा जुड़ाव महसूस होता है। “सेलेब्रिटी के पास एक आवाज़ होती है जो दूर तक जाती है। हम अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके असली समस्याओं पर बात कर सकते हैं और लोगों को हिम्मत दे सकते हैं कि हार न मानें। छोटी-सी पहल भी फर्क ला सकती है।”
मीडिया के ग्लैमर दिखाने पर वह कहती हैं, “मैं समझती हूं कि लोग ऐसा क्यों सोचते हैं। मीडिया ज़्यादातर चमक-दमक दिखाता है, लेकिन सच ये है कि हर एक्टर को भी रिजेक्शन, संघर्ष और मुश्किल दिनों का सामना करना पड़ता है।”
अपने सफर को याद करते हुए वह बताती हैं, “एक्टर बनने से पहले मैंने भी ऑडिशन, सफर और शहर में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष किया। आज भी मैं वही ट्रैफिक और महंगाई झेलती हूं, जो बाकी सब लोग झेलते हैं।”
शिवांगी मानती हैं कि मुंबई उनकी सबसे बड़ी गुरु रही है। “इस शहर ने मुझे सब्र करना सिखाया है, मज़बूत रहना सिखाया है और कभी हार न मानना सिखाया है। अगर मुझे मौका मिले, तो मैं ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट की दिक्कतों पर ज़्यादा ध्यान दिलाना चाहूंगी, क्योंकि ये हर एक इंसान को प्रभावित करती हैं,” वह कहती हैं।


