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मुंबई(दानिश खान)हर युग और हर आत्मा में, धर्म और अधर्म के बीच शाश्वत युद्ध ने भगवान कृष्ण की कंस पर विजय से लेकर हमारे समय को परिभाषित करने वाले संघर्षों तक, भाग्य की कहानी लिखी है। कलर्स की ‘बिंदी’, दिव्य बालक कृष्ण की तरह, सलाखों के पीछे पैदा हुई एक छोटी लड़की की यात्रा के माध्यम से अच्छाई बनाम बुराई के इस शाश्वत रूपक को जीवंत करती है। बिंदी (सांची भोयर द्वारा अभिनीत) बड़ी होकर सच्चाई और संघर्ष की प्रतीक बन जाती है, जो अपनी माँ काजल (राधिका मुथुकुमार द्वारा अभिनीत) का खोया हुआ सम्मान वापस दिलाती है। एक ऐसी दुनिया में जहाँ प्यार और विश्वासघात अक्सर एक ही चेहरा धारण करते हैं, बिंदी इतनी कम उम्र में छल और अन्याय के खिलाफ उठने का साहस करती है। वह अपनी कहानी की कृष्ण बन जाती है, सत्य की खोज में निडर, अपने जीवन के कंस दयानंद (मानव गोहिल द्वारा अभिनीत) का पर्दाफाश करने और अपनी माँ के सम्मान को बहाल करने के लिए दृढ़ संकल्पित।

 

प्रेम, हानि और मुक्ति की इस दिलचस्प गाथा में, नियति काजल, जो अविराज (कृशाल आहूजा द्वारा अभिनीत) की पत्नी है, और उनकी बेटी बिंदी के जीवन को ऐसे तरीके से जोड़ती है जिसकी उनमें से कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। काजल को धोखा देने के वर्षों बाद, अविराज फिर से उससे मिलता है जब वह उसे गुंडों द्वारा घसीटते हुए पाता है और अपराधबोध और सहज प्रवृत्ति से प्रेरित होकर, उसे बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालता है। लेकिन भाग्य को एक अंतिम मोड़ देना है। वह लड़की जो उसे मौत के कगार से बचाती है, कोई और नहीं बल्कि बिंदी है, जो उसके विश्वासघात के कारण सलाखों के पीछे पैदा हुई बच्ची है। सच्चाई अविराज की दुनिया को तहस-नहस कर देती है, उसे अपराधबोध और प्रायश्चित के बीच उलझा देती है, क्योंकि बिंदी उसके सामने अपनी बेटी के रूप में खड़ी है जिसे वह कभी जानता ही नहीं था। लेकिन सवाल यह है कि बिंदी के सामने सच्चाई कब सामने आएगी, क्या इससे उसे माफ़ी मिलेगी या ऐसा तूफ़ान आएगा जो उन्हें हमेशा के लिए तोड़ देगा?

 

*कलर्स के ‘बिंदी’ में बिंदी की भूमिका निभा रहीं सांची भोयर कहती हैं,* _“बिंदी की यात्रा भगवान कृष्ण की तरह है—जो जेल में पैदा हुईं और अपने जीवन के कंस से लड़ीं। मेरे लिए, भगवान कृष्ण का कंस के खिलाफ संघर्ष हमेशा दिखाता है कि कैसे साहस और सच्चाई बुराई पर विजय पा सकती है। बिंदी की यात्रा भी कुछ ऐसी ही है—जेल में जन्मी, सच के लिए लड़ती—ये है बिंदी, अपने युग की कृष्ण। वह भी कृष्ण की तरह जेल में पैदा हुई थीं और गलत के खिलाफ खड़ी हैं, चाहे वह कितना भी मजबूत क्यों न लगे। यह कहानी मेरे लिए बहुत खास है क्योंकि यह एक बेटी के प्यार और अपनी माँ की रक्षा करने और अपनी बेगुनाही साबित करने के दृढ़ संकल्प के बारे में है। कभी-कभी उसे डर लगता है, लेकिन वह कभी हार नहीं मानती, क्योंकि वह दिल से मानती है कि अंत में अच्छाई की ही जीत होगी।”_

 

*कलर्स के ‘बिंदी’ में दयानंद की भूमिका निभा रहे मानव गोहिल कहते हैं,* _“दयानंद की दुनिया का मतलब एक ऐसे व्यक्ति का रूप जो शक्ति, चालाकी और नियंत्रण में फलता-फूलता है। कंस की तरह, उसे विश्वास है कि उसकी शक्ति सत्य को दबा सकती है और दुनिया को अपनी इच्छा के अनुसार झुका सकती है। दयानंद सिर्फ़ दुष्ट होने के लिए ही दुष्ट नहीं है, उसका अंधकार अहंकार, भय और नियंत्रण में बने रहने की तीव्र इच्छा से उपजा है। यही विश्वास उसे खतरनाक और आकर्षक दोनों बनाता है। मेरे लिए, यह किरदार अच्छाई और बुराई के बीच शाश्वत युद्ध का प्रतिनिधित्व करता है, वही संघर्ष जो कभी भगवान कृष्ण ने लड़ा था, और अब आधुनिक दुनिया में पुनर्जन्म ले चुके हैं। इतने गहन और बहुस्तरीय किरदार को निभाने का यह एक दुर्लभ अवसर है, और मैं दर्शकों को मेरे इस पहलू का अनुभव कराने के लिए उत्साहित हूँ।”_

 

*कलर्स का ‘बिंदी’ रोज़ाना रात 8:30 बजे सिर्फ़ कलर्स पर देखें।*

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