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Thu. Aug 6th, 2026
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आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- “देश की नीति में स्वेच्छा से अंतरराष्ट्रीय व्यवहार होना चाहिए, दबाव में नहीं। यह स्वदेशी है, कुटुंब प्रबोधन परिवार में बैठकर सोचे कि अपने भारत के लिए हम क्या कर सकते हैं। अपने देश, समाज के लिए किसी प्रकार से कोई भी कार्य करना, पौधा लगाने से लेकर वंचित वर्ग के बच्चों को पढ़ाने तक का कोई भी छोटा सा कार्य करने से देश और समाज से जुड़ने का मानस बनेगा।दिल्ली में चल रहे आरएसएस के ‘100 वर्ष की संघ यात्रा- नए क्षितिज’ पर बोलते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक समरसता का कार्य कठिन होते हुए भी करना ही होगा, उसके अलावा कोई उपाय नहीं है। मोहन भागवत ने अपने आसपास के वंचित वर्ग में मित्रता करने, मंदिर, पानी और श्मशान में कोई भेद न रहे, किसी को कोई रोक ना हो, ऐसी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता सब बातों की कुंजी है। अपना देश आत्मनिर्भर होना चाहिए। आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी के उपयोग को प्राथमिकता दें।

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