मुंबई :लातूर ज़िले के हाडोलती गांव से एक दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक बुज़ुर्ग किसान दंपती को खेत की बुआई के लिए न तो बैल मिले, न मजदूर और न ही ट्रैक्टर का किराया चुकाने की क्षमता बची। मजबूरी में इस 75 वर्षीय दंपती ने खुद को बैलों की जगह हल में जोत लिया।आजतक की खबर के मुताबिक किसान अंबादास पवार हल खींचते हुए आगे चल रहे हैं और उनकी पत्नी मुक्ताबाई पवार पीछे से हल चला रही हैं। बीते दो वर्षों से यह किसान जोड़ा खुद ही हल चलाकर खेतों में बुआई कर रहा है। किसान अंबादास पवार ने बताया कि भारी बारिश और घाटे के कारण उनकी पूरी लागत भी नहीं निकल पाई, उल्टा खेत पर कर्ज और बढ़ गया है।
जहाँ सरकार आत्मनिर्भर किसान की बात करती है, वहीं ये तस्वीर एक अलग ही सच्चाई बयां कर रही है — कि कुछ किसान अब भी बुनियादी संसाधनों के लिए तरस रहे हैं।
अंबादास पवार ने सरकार से अपील करते हुए कहा, “हमारी बस इतनी ही विनती है कि किसानों का कर्ज माफ किया जाए, ताकि हम चैन से जी सकें।


