जमीयत उलमा-ए-हिंद ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री से इस मामले का तत्काल संज्ञान लेने और संबंधित अधिकारियों, विशेष रूप से दिल्ली वक्फ बोर्ड और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने का अनुरोध किया। मेमोरेंडम में यह भी मांग की गई कि सरकारी अभिलेखों की पूरी जांच, संपत्तियों की कानूनी स्थिति की पुष्टि और लागू कानूनों एवं न्यायिक आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किए बिना मस्जिद या कब्रिस्तान को ध्वस्त करने अथवा ऐसी कोई कार्रवाई करने से परहेज किया जाए, जिसके परिणाम अपूरणीय हों। साथ ही, नमाजियों की आवाजाही और पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को तत्काल बहाल करने पर जोर दिया गया।
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने मस्जिद और कब्रिस्तान को ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए सभी उपलब्ध कानूनी उपायों और अन्य वैध माध्यमों को अपनाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की, ताकि इनकी धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता और कानूनी स्थिति सुरक्षित रह सके। प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत मांगों और चिंताओं को गंभीरता से सुनने के बाद केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आश्वासन दिया कि वह इस मामले में अपनी ओर से हर संभव प्रयास करेंगे।जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात कर नई दिल्ली में मकबरा सफदरजंग के पीछे स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान के संरक्षण का मामला उठाया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की ओर से मंत्री महोदय को एक विस्तृत मेमोरेंडम सौंपा। इसमें मस्जिद और कब्रिस्तान के धार्मिक, ऐतिहासिक एवं कानूनी महत्व को रेखांकित करते हुए उनके संरक्षण के लिए तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया।
