संजय राउत की किताब ‘बोध कीर्तन’ का विमोचन शनिवार को ठाकरे भाइयों ( उद्धव और राज ठाकरे) की मौजूदगी में होने जा रहा है। इस किताब में संजय राउत के निजी अनुभवों, उनके मिले लोगों और पढ़े हुए लेखों का संग्रह है।शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सांसद संजय राउत अपनी नई किताब बोध कीर्तन में कुछ ऐसे विचार लेकर आए हैं, जो राजनीतिक और कारोबारी जगत में चर्चा का विषय बन सकते हैं। किताब में उन्होंने भगोड़े आर्थिक अपराधी घोषित किए जा चुके विजय माल्या का बचाव किया है।संजय राउत ने अपनी किताब में लिखा है कि वे विजय माल्या को काफी करीब से जानते थे, क्योंकि संसद और सेंट्रल हॉल में वे अक्सर आसपास ही बैठते थे। माल्या एक मिलनसार, हंसमुख और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले इंसान थे। माल्या की लग्जरी लाइफस्टाइल की वजह से लोगों में गलतफहमियां हुईं, जबकि वह उनके बिजनेस की जरूरत रही होगी। वे संसद के कई नेताओं से ज्यादा देशप्रेमी, दरियादिल और साफ दिल इंसान थे, जिनकी नीयत किसी को ठगने की नहीं थी। जब वे अचानक देश छोड़कर चले गए तो लोगों ने उन्हें ‘भगोड़ा’ कह दिया, लेकिन संजय राउत इस बात से सहमत नहीं हैं। राउत का कहना है कि जब माल्या का बिजनेस डूबा और बैंक लोन बकाया हुआ, तब बैंकों को उनकी मदद करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बीते 10 सालों में कई उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए, जबकि माल्या को माफी नहीं बल्कि थोड़ी राहत चाहिए थी। आखिरकार उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर किया गया, इसलिए वे कोई फ्रॉड नहीं थे।

